फिलीपींस में एक निकासी केंद्र के बाहर, एक परिवार तीन बड़े बैग लेकर आया था — कपड़े, बर्तन, यहाँ तक कि टीवी का रिमोट। लेकिन उनके पास N95 मास्क नहीं था, पानी साफ करने की कोई गोली नहीं थी, और घर के कागज़ात एक पॉलिथीन बैग में भी नहीं रखे थे। ज्वालामुखी से राख की बारिश शुरू होने के बाद वे घर से निकले थे — लेकिन उन्हें जो सबसे ज़रूरी था, वह पीछे छूट गया था। यह कहानी उस परिवार की नहीं है। यह उन हज़ारों परिवारों की कहानी है जो ज्वालामुखीय आपदाओं में एक ही गलती दोहराते हैं: वे भागते हैं, लेकिन तैयार नहीं होते।
भारत में अधिकांश लोग ज्वालामुखी को दूर की बात मानते हैं। और यह काफी हद तक सच भी है — भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी बैरन आइलैंड अंडमान सागर में है, जहाँ कोई आम नागरिक नहीं रहता। लेकिन हर साल हज़ारों भारतीय इंडोनेशिया, जापान, फिलीपींस, इटली और आइसलैंड जैसे देशों में काम, पढ़ाई, या पर्यटन के लिए जाते हैं — वे सब ज्वालामुखी के साये में जीते हैं। इसके अलावा, 2014 में ओंटेक ज्वालामुखी (जापान) और 2022 में हुंगा टोंगा के विस्फोट जैसी घटनाओं ने दिखाया है कि राख, उड़ानें रद्द होना, और पानी दूषित होना — ये सब दुनिया के एक कोने में हुई घटना से दूसरे कोने के लोगों को कैसे प्रभावित कर सकती है।
यह लेख उन भारतीयों के लिए है — जो ज्वालामुखी-सक्रिय क्षेत्रों में रहते, काम करते, या यात्रा करते हैं — और उनके लिए भी, जो किसी दिन वहाँ जाने की सोच रहे हैं।
- खतरनाक क्षेत्र की पहचान: पहले यह जान लें, बाकी सब बाद में
- राख की बारिश: जो लोग सोचते हैं वह गलत है
- लहर (लाहार) और मडफ्लो: वह खतरा जो नज़र नहीं आता
- आपातकालीन किट: क्या रखें और कितना
- बच्चे, बुज़ुर्ग और दिव्यांग: जिनकी ज़रूरत अलग होती है
- निकासी कब करें, घर में कब रहें: एक स्पष्ट नियम
- वो गलतियाँ जो स्थिति को और खराब करती हैं
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
खतरनाक क्षेत्र की पहचान: पहले यह जान लें, बाकी सब बाद में
जब आप किसी ज्वालामुखी के पास रहते या यात्रा करते हैं, तो सबसे पहला काम है — यह जानना कि आप किस खतरनाक क्षेत्र में हैं। USGS Volcano Hazards Program (www.usgs.gov/programs/VHP) और Smithsonian Global Volcanism Program (volcano.si.edu) दुनिया के हर सक्रिय ज्वालामुखी का नक्शा और खतरे का स्तर बताते हैं।
हर ज्वालामुखी-सक्रिय देश में खतरे के क्षेत्रों को रंग या संख्या से चिह्नित किया जाता है। फिलीपींस में PHIVOLCS, जापान में Japan Meteorological Agency, और इंडोनेशिया में PVMBG यह जानकारी देते हैं। अपने ठहरने की जगह का पता डालकर देखें कि वह Zone 1 (सबसे खतरनाक — स्थायी निषिद्ध क्षेत्र) में है, Zone 2 में है, या बाहर।
निर्णय नियम: अगर आपका होटल, किराये का घर, या कार्यालय किसी ज्वालामुखी के 10 किलोमीटर के भीतर है — तो आज रात ही स्थानीय अलर्ट सिस्टम का नंबर और निकटतम निकासी मार्ग जान लें। यह काम 10 मिनट में हो सकता है और किसी दिन आपकी जान बचा सकता है।
राख की बारिश: जो लोग सोचते हैं वह गलत है
सबसे आम गलतफहमी यह है कि राख की बारिश सिर्फ असुविधाजनक होती है — जैसे धूल। वास्तव में, ज्वालामुखीय राख बारीक कांच के टुकड़ों जैसी होती है। यह फेफड़ों को नुकसान पहुँचाती है, आँखों में जलन करती है, और घरों की छतों पर जमा होकर उन्हें ढहा सकती है। 2014 में जापान के ओंटेक ज्वालामुखी विस्फोट में और 2021 में फिलीपींस के Taal ज्वालामुखी की गतिविधि के दौरान, राख के कारण हज़ारों लोगों को अचानक घर छोड़ना पड़ा था।
आपदा राहत कार्य में बार-बार एक पैटर्न देखा गया है: लोग भूकंप या विस्फोट के तुरंत बाद बाहर भागते हैं — और यही गलती उन्हें सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाती है। गिरते मलबे, राख और ज़हरीली गैसें बाहर ज़्यादा खतरनाक होती हैं। अगर राख गिर रही हो, तो पहले घर के अंदर रहें — दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद करें, गीले कपड़े से दरारें भरें, और स्थानीय रेडियो या अधिकारियों का इंतज़ार करें।
राख की स्थिति में सबसे ज़रूरी चीज़ है एक अच्छा फिल्टर मास्क — N95 या FFP2 स्तर का। साधारण कपड़े का मास्क ज्वालामुखीय राख को नहीं रोकता। अगर आप ऐसे किसी क्षेत्र में रहते हैं, तो घर में कम से कम हर परिवार के सदस्य के लिए 3-4 अतिरिक्त N95 मास्क रखना एक छोटी लेकिन बहुत ज़रूरी तैयारी है।
लहर (लाहार) और मडफ्लो: वह खतरा जो नज़र नहीं आता
ज्वालामुखी विस्फोट के बाद सबसे कम समझा जाने वाला खतरा है लहर — यानी ज्वालामुखीय मडफ्लो। जब ज्वालामुखीय राख और मलबा बारिश के पानी के साथ मिलता है, तो यह कंक्रीट जैसी मोटी, तेज़ बहने वाली धारा बन जाती है। यह नदी के किनारे, घाटियों और नालों के रास्ते से आती है — और विस्फोट के घंटों या यहाँ तक कि दिनों बाद भी आ सकती है।
भारत के पड़ोसी देश इंडोनेशिया में 2010 में माउंट मेरापी विस्फोट के बाद लहर ने दूर-दूर तक के गाँवों को नष्ट किया था — और कई परिवार तब फँसे जब उन्हें लगा कि मुख्य खतरा टल गया है। बरसात के मौसम में (जून से सितंबर — जो भारत की मॉनसून अवधि से मेल खाता है) यह खतरा कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि पानी और राख का मेल तेज़ी से होता है।
निर्णय नियम: अगर आप ज्वालामुखी के पास किसी नदी या नाले के किनारे रहते हैं और विस्फोट हो चुका है — तो बिना किसी चेतावनी का इंतज़ार किए ऊँची ज़मीन की तरफ जाएँ। लहर किसी साइरन से पहले नहीं आती।
आपातकालीन किट: क्या रखें और कितना
निकासी केंद्रों में बार-बार देखा गया है कि लोग पहले दिन खाना और पानी ले आते हैं, लेकिन दूसरे या तीसरे दिन सबसे ज़्यादा तकलीफ होती है — दवाओं की, कागज़ातों की, और पानी साफ करने के तरीकों की। ज्वालामुखीय राख पानी के स्रोतों को दूषित कर देती है, इसलिए स्वच्छ पानी का भंडार सबसे ज़रूरी है।
- पानी: कम से कम 3 दिन के लिए — प्रति व्यक्ति 3 लीटर प्रति दिन। बंद बोतलों में रखें।
- N95/FFP2 मास्क: हर सदस्य के लिए 3-4 अतिरिक्त।
- खाना: 3 दिन का सूखा राशन — चावल, दाल, बिस्किट, नमकीन। जो बिना पकाए भी खाया जा सके।
- दवाइयाँ: कम से कम 7 दिन की नियमित दवाएँ, प्राथमिक चिकित्सा किट।
- कागज़ात: पासपोर्ट, आधार/पहचान पत्र, बीमा, दूतावास का नंबर — वाटरप्रूफ पाउच में।
- टॉर्च और एक्स्ट्रा बैटरी — बिजली गुल होना पहली चीज़ है जो होती है।
- रेडियो (बैटरी-चालित): राख के दौरान इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क दोनों बंद हो सकते हैं।
- चश्मा (सीलबंद करने योग्य): राख से आँखें बचाने के लिए। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वाले विशेष सावधानी बरतें।
- दूतावास और स्थानीय इमरजेंसी नंबर: लिखकर रखें — फोन की बैटरी पर भरोसा न करें।
अगर आप विदेश में हैं, तो भारतीय दूतावास का नंबर और NDMA की गाइडलाइन्स पहले से डाउनलोड करके रखें: ndma.gov.in। परिवार के साथ एक आपदा योजना पहले से बनाना इस पूरी प्रक्रिया को आसान बनाता है — इसके लिए देखें: एक दोपहर में बनाएं परिवार की जीवनरक्षक आपदा योजना।
बच्चे, बुज़ुर्ग और दिव्यांग: जिनकी ज़रूरत अलग होती है
ज्वालामुखीय आपदाओं में सबसे ज़्यादा कमज़ोर वही होते हैं जिनकी साँस पहले से कमज़ोर होती है। बच्चों के फेफड़े राख के कणों के प्रति ज़्यादा संवेदनशील होते हैं। बुज़ुर्ग, जिन्हें अस्थमा, हृदय रोग, या चलने-फिरने में दिक्कत हो — उनके लिए अलग योजना बनानी होती है।
- बच्चों के लिए बच्चों के आकार का N95 मास्क अलग से रखें — बड़ों का मास्क उन पर फिट नहीं होता।
- बुज़ुर्गों और दिव्यांग सदस्यों के लिए पहले से तय करें कि उन्हें कौन उठाएगा और कहाँ ले जाएगा।
- अगर परिवार में व्हीलचेयर उपयोगकर्ता हैं, तो निकासी मार्ग पर पहले से जाकर देखें — क्या वह रास्ता उनके लिए उपयुक्त है?
- जोड़ परिवारों में (joint family) — एक-एक ज़िम्मेदारी पहले से बाँट लें: कौन बच्चों को संभालेगा, कौन किट उठाएगा, कौन बुज़ुर्गों के साथ रहेगा।
पालतू जानवर भी इस योजना का हिस्सा होने चाहिए — निकासी केंद्र हमेशा जानवरों को स्वीकार नहीं करते, इसलिए पहले से पूछताछ करें। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए देखें: पालतू जानवर बचाएं: आपदा से पहले ये गलती मत करें।
निकासी कब करें, घर में कब रहें: एक स्पष्ट नियम
सबसे बड़ी दुविधा यही होती है — जाएँ या रुकें? आपदा राहत में देखा गया एक दोहराव वाला पैटर्न यह है: लोग या तो बहुत जल्दी घबरा जाते हैं और बिना तैयारी के निकल पड़ते हैं, या बहुत देर तक इंतज़ार करते हैं।
यहाँ एक सीधा नियम है जिसे बिना किसी से पूछे लागू किया जा सकता है:
- तुरंत निकलें — अगर स्थानीय प्राधिकरण ने “Mandatory Evacuation” या “Alert Level 4/5” जारी किया हो।
- तुरंत निकलें — अगर आप ज्वालामुखी की तरफ से गड़गड़ाहट, ज़मीन हिलने, या आसमान काला होते देखें।
- तुरंत निकलें — अगर आप किसी नदी या नाले के पास हैं और विस्फोट की खबर आई हो — लहर का खतरा है।
- घर में रहें — अगर सिर्फ हल्की राख गिर रही हो, कोई आधिकारिक आदेश न हो, और आपका घर ठोस (pucca) हो। दरवाज़े-खिड़कियाँ बंद रखें, राख से भरी हवा में न जाएँ।
- घर में रहें — अगर बाहर pyroclastic flow (आग और राख की तेज़ लहर) का खतरा हो। यह लहर 700°C तक गर्म हो सकती है — बाहर निकलना जानलेवा है।
IMD के मौसम अलर्ट और स्थानीय सरकारी एजेंसियों की सूचना नियमित रूप से देखते रहें: mausam.imd.gov.in। अगर आप विदेश में हैं, तो वहाँ की स्थानीय मौसम और ज्वालामुखी एजेंसी का अलर्ट सिस्टम पहले से subscribe करें।
वो गलतियाँ जो स्थिति को और खराब करती हैं
कुछ चीज़ें हैं जो लोग सबसे ज़्यादा करते हैं — और जो सबसे ज़्यादा नुकसान पहुँचाती हैं:
- विस्फोट के तुरंत बाद बाहर भागना: यह सबसे आम और सबसे खतरनाक गलती है। बाहर गिरती राख, ज़हरीली गैस, और अस्थिर ज़मीन — ये सब अंदर से ज़्यादा खतरनाक हैं। पहले 10-15 मिनट घर के मज़बूत हिस्से में रहें, ज़मीन की हलचल रुकने का इंतज़ार करें।
- छत की राख साफ करने जाना: भारी राख की परत छतों को तोड़ सकती है, लेकिन साफ करने जाना तब तक न करें जब तक स्थानीय अधिकारियों ने “All Clear” न दिया हो। छत पर फिसलने और राख साँस में लेने का दोहरा खतरा है।
- कच्चा पानी पीना: राख पानी के
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
ज्वालामुखी विस्फोट से पहले निकासी के लिए कितना समय मिलता है?
ज्वालामुखी विशेषज्ञ आमतौर पर अलर्ट जारी होने के बाद 30 मिनट से 2 घंटे के भीतर निकासी की सलाह देते हैं। कुछ ज्वालामुखी जैसे फिलीपींस का टाल, बिना चेतावनी के भी अचानक फट सकते हैं, इसलिए पहले से तैयार एक “गो-बैग” रखना अनिवार्य है।
ज्वालामुखी की राख से बचने के लिए कौन सा मास्क सबसे सुरक्षित है?
N95 या P100 रेस्पिरेटर मास्क ज्वालामुखीय राख के बारीक कणों से सुरक्षा के लिए सबसे प्रभावी माने जाते हैं। साधारण सर्जिकल मास्क 2.5 माइक्रोन से छोटे राख कणों को नहीं रोक सकते, जो फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं।
ज्वालामुखी के पास रहने वाले लोगों को इमरजेंसी किट में क्या रखना चाहिए?
इमरजेंसी किट में कम से कम 72 घंटों के लिए पानी (प्रति व्यक्ति 3 लीटर प्रतिदिन), N95 मास्क, पानी साफ करने की गोलियाँ, ज़रूरी दस्तावेज़ वाटरप्रूफ बैग में, टॉर्च और प्राथमिक चिकित्सा किट शामिल होनी चाहिए। NDMA और WHO दोनों 3 दिन की स्वायत्त जीवन क्षमता को न्यूनतम मानक मानते हैं।
भारतीय नागरिक विदेश में ज्वालामुखी आपदा के दौरान मदद के लिए कहाँ संपर्क करें?
भारतीय दूतावास का आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और MEA (विदेश मंत्रालय) का 24×7 कंट्रोल रूम नंबर +91-11-2301-2113 तु
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