2013 की उत्तराखंड बाढ़ के बाद, और 2018 में केरल की बाढ़ के दौरान राहत शिविरों में जो तस्वीर बार-बार सामने आई — एक परिवार किसी तरह अपने कुत्ते को साथ लेकर पहुँचता है, लेकिन उसके लिए न खाना है, न पानी, न दवाई। जानवर घबराया हुआ है, मालिक थका हुआ है, और बाकी लोग परेशान हैं कि इस जानवर को यहाँ क्यों लाया गया। उन शिविरों में सबसे बड़ी समस्या यह नहीं थी कि परिवारों के पास सामान नहीं था — बल्कि यह थी कि उन्होंने कभी सोचा ही नहीं था कि पालतू जानवर के साथ निकासी अलग तरह की होती है। बाढ़ आए, चक्रवात आए, या भूस्खलन हो — भारत के ओडिशा, केरल, असम और उत्तराखंड जैसे राज्यों में मानसून के महीने यही सबक देते हैं, बार-बार। और हर बार वही गलती।
अगर आपके घर में कुत्ता, बिल्ली, या कोई भी पालतू जानवर है, तो यह लेख उस तैयारी की बात करता है जो आधिकारिक चेकलिस्ट में नहीं मिलती — वह जो असल में काम आती है।
- आज ही तय करें: आपका पालतू निकासी में कहाँ जाएगा?
- वह गलतफहमी जो सबसे ज़्यादा नुकसान करती है
- पालतू निकासी किट: वज़न तय करता है कि बैग जाएगा या नहीं
- बाढ़ और चक्रवात में निकलने का सही समय: एक स्पष्ट नियम
- वे चीज़ें जो लोग भूल जाते हैं — और बाद में पछताते हैं
- बुज़ुर्ग, बच्चे और विकलांग परिवार के सदस्य: जानवर की ज़िम्मेदारी किसकी होगी?
- घर पर आश्रय लेना हो तो: पालतू जानवर के लिए 72 घंटे की तैयारी
- आज 10 मिनट में करने वाला एक काम
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- क्या भारत के सरकारी निकासी केंद्रों में पालतू जानवरों को अनुमति मिलती है?
- पालतू जानवर के लिए आपातकालीन किट में क्या-क्या रखना चाहिए?
- आपदा के दौरान पालतू जानवर को घर पर अकेला छोड़ना सही है या नहीं?
- भारत में आपदा के समय पालतू जानवर खो जाए तो क्या करें?
- मानसून सीज़न से पहले पालतू जानवर के लिए कौन सी तैयारी सबसे ज़रूरी है?
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आज ही तय करें: आपका पालतू निकासी में कहाँ जाएगा?
यह सवाल जितना सरल लगता है, उतना है नहीं। ज़्यादातर सरकारी राहत शिविर और निकासी केंद्र जानवरों को अंदर नहीं आने देते। यह नियम क्रूरता नहीं है — यह भीड़, एलर्जी, और स्वच्छता की व्यावहारिक सच्चाई है। इसलिए पहला काम यह नहीं है कि बैग पैक करें, बल्कि यह तय करें कि जानवर को कहाँ ले जाएँगे।
अभी — यानी आज — तीन लोगों के नाम और नंबर लिख लें: एक पड़ोसी जो जानवर रख सके, एक रिश्तेदार जो थोड़ी दूर रहता हो, और अपने शहर का कोई पशु चिकित्सालय या पेट बोर्डिंग सेंटर। इनसे पहले से बात कर लें — आपदा के वक्त अनुमति माँगने का समय नहीं होता। यह व्यक्तिगत पालतू संपर्क नेटवर्क (यानी आपका खुद बनाया हुआ भरोसेमंद लोगों का समूह) आपकी सबसे पहली और सबसे ज़रूरी तैयारी है।
अगर आप यह नहीं जानते कि अपने जिले में पेट-फ्रेंडली शरण कहाँ मिल सकती है, तो NDMA India (ndma.gov.in) के दिशानिर्देशों में — विशेष रूप से NDMA की “Guidelines on Management of Animals in Disasters” (2015 में जारी) — पशु प्रबंधन से संबंधित जानकारी मिल सकती है। साथ ही अपने स्थानीय नगरपालिका कार्यालय से एक बार पूछना ज़रूरी है।
वह गलतफहमी जो सबसे ज़्यादा नुकसान करती है
बहुत से पालतू पशु मालिक सोचते हैं: “मेरा जानवर तो घर में है, खिड़की बंद है, तूफान में ठीक रहेगा।” यह सोच बाढ़ और चक्रवात के संदर्भ में बेहद खतरनाक है। पानी तेज़ी से बढ़ता है — जो कमरा आधे घंटे पहले सुरक्षित लग रहा था, वह घुटनों तक भर सकता है। जानवर तैर सकते हैं, लेकिन अगर दरवाज़ा बंद हो और पानी अंदर आ जाए, तो वे फँस जाते हैं।
दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि जानवर खुद रास्ता ढूँढ लेंगे। यह जंगल में सच हो सकता है, शहरी आपदा में नहीं। शहरों में सड़कें बंद होती हैं, ट्रैफिक होता है, और जानवर घबराहट में गलत दिशा में भागते हैं। पालतू जानवर बचाएं: आपात में सही फैसला कैसे लें? — इस विषय पर और गहराई से समझने के लिए यह लेख मददगार है।
तीसरी गलतफहमी: “थोड़ा पहले छोड़ दूँगा, वापस आकर ले जाऊँगा।” आपदा प्रतिक्रिया में यह “वापस आना” अक्सर संभव नहीं होता। सड़कें बंद हो जाती हैं, इलाके कॉर्डन हो जाते हैं। अगर जानवर को साथ नहीं लेकर गए, तो अगली बार मिलेगा या नहीं — यह तय नहीं।
पालतू निकासी किट: वज़न तय करता है कि बैग जाएगा या नहीं
2018 केरल बाढ़ और 2021 असम बाढ़ के बाद राहत कार्यों में एक ही पैटर्न बार-बार सामने आया: सबसे बड़ी गलती वह नहीं होती जो किट में नहीं है — बल्कि यह होती है कि किट इतनी भारी होती है कि उसे उठाया ही नहीं जा सकता। एक हाथ में बच्चा हो, दूसरे में छाता और दस्तावेज़, और पीठ पर 15 किलो का बैग — ऐसे में जानवर की किट दरवाज़े पर ही छूट जाती है।
इसलिए पालतू जानवर की किट 5 किलो से कम रखें, और उसे अलग एक छोटे बैग में रखें जिसे जानवर का मालिक खुद उठा सके। इसमें क्या होना चाहिए:
- खाना: कम से कम 3 दिन का सूखा खाना (एयरटाइट पैकेट में), एक छोटा फोल्डेबल बाउल
- पानी: एक लीटर की बोतल — और यह मान कर चलें कि निकासी केंद्र में पानी मिलना मुश्किल होगा
- दवाइयाँ: अगर जानवर को कोई नियमित दवा देते हैं, तो कम से कम 5-7 दिन का अतिरिक्त स्टॉक हमेशा किट में रखें
- पट्टा और कॉलर: पहचान टैग के साथ, जिस पर आपका मोबाइल नंबर लिखा हो
- एक पुरानी टी-शर्ट या कपड़ा जिसपर आपकी खुशबू हो — घबराए हुए जानवर को यह शांत करता है
- कैरियर बैग या पिंजरा — छोटे जानवरों के लिए, जो पहले से जानवर को परिचित हो
- वैक्सीनेशन रिकॉर्ड की फोटोकॉपी — कुछ आश्रय स्थल बिना इसके जानवर को अंदर नहीं लेते
एक अच्छा वॉटरप्रूफ पेट कैरियर बैग जो हल्का हो और जिसमें वेंटिलेशन हो — यह उस वक्त काम आता है जब बाढ़ के पानी में चलना पड़े और जानवर को भीगने से बचाना हो।
पालतू जानवर बचाने की सही तैयारी कैसे करें? — किट की विस्तृत सूची और प्राथमिकता के बारे में यहाँ और पढ़ें।
बाढ़ और चक्रवात में निकलने का सही समय: एक स्पष्ट नियम
पालतू जानवर के साथ निकलने का फैसला मुश्किल होता है क्योंकि जानवर को तैयार करने में वक्त लगता है — और यह वक्त अक्सर लोगों के पास नहीं होता।
IMD का अलर्ट सिस्टम इस फैसले के लिए सबसे भरोसेमंद आधार है। IMD तीन रंगों में अलर्ट जारी करता है — येलो (सतर्क रहें), ऑरेंज (तैयार रहें), और रेड (तुरंत कार्रवाई करें) — और यही वर्गीकरण IMD अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर प्रकाशित करता है। इसी के आधार पर यह नियम काम करता है: जब IMD का ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी हो, तो जानवर को लेकर निकलने की तैयारी शुरू कर दें — इंतज़ार मत करें कि पानी घर के अंदर आए। IMD (mausam.imd.gov.in) पर रियल-टाइम अलर्ट देखे जा सकते हैं।
जानवर के साथ निकलने में अकेले निकलने से दोगुना वक्त लगता है — यह ज़मीनी हकीकत है। इसलिए:
- येलो अलर्ट पर: किट तैयार करें, जानवर का कैरियर निकालें, नेटवर्क को सूचित करें
- ऑरेंज अलर्ट पर: निकलने का फैसला कर लें, रुकने का नहीं
- रेड अलर्ट पर: घर के सबसे ऊँचे और मज़बूत हिस्से में जाएँ अगर निकलना संभव न हो
चक्रवात अलर्ट को सही तरह समझने के लिए यह विश्लेषण भी मददगार है: NDMA चक्रवाती तूफान अलर्ट पर क्या करें।
वे चीज़ें जो लोग भूल जाते हैं — और बाद में पछताते हैं
2018 केरल बाढ़ और 2019 चक्रवात फणी (ओडिशा) के बाद राहत कार्यों में दर्ज किया गया: जो चीज़ें छूटती हैं वे नाटकीय नहीं होतीं। कोई बड़ी गलती नहीं, कोई भूला हुआ जनरेटर नहीं — बल्कि जानवर की नियमित दवा जो काउंटर पर रखी थी, वैक्सीनेशन कार्ड जो फाइल में था, या वह छोटी सी रकम जो ATM बंद होने पर बहुत ज़रूरी थी।
पालतू जानवर के मालिकों के लिए यह सूची विशेष रूप से महत्वपूर्ण है:
- जानवर की दवाइयाँ — यह सबसे ज़्यादा भूली जाने वाली चीज़ है, खासकर अगर जानवर को कोई पुरानी बीमारी है
- नकद पैसे, छोटे नोटों में — कम से कम 500-1000 रुपये — निकासी के दौरान डिजिटल पेमेंट अक्सर काम नहीं करता
- फोन चार्जर और पावर बैंक — बिजली जाने पर संपर्क टूट जाता है, और तब जानवर को कहाँ ले जाएँ यह पूछने का रास्ता भी बंद हो जाता है
- जानवर की एक हालिया फोटो — अगर जानवर भाग जाए तो ढूँढने में मदद मिलती है
- अपना चश्मा या ज़रूरी प्रिस्क्रिप्शन — मालिक ठीक नहीं होगा तो जानवर की देखभाल कौन करेगा?
पालतू जानवर बचाएं: आपात में ये गलती मत करना — इन गलतियों की पूरी सूची यहाँ देखें।
बुज़ुर्ग, बच्चे और विकलांग परिवार के सदस्य: जानवर की ज़िम्मेदारी किसकी होगी?
यह बात पहले से तय होनी चाहिए। आपदा के वक्त हर कोई अपनी-अपनी ज़िम्मेदारी में व्यस्त होता है — बच्चों को सँभालना, बुज़ुर्गों को चलाना, ज़रूरी सामान उठाना। उस भीड़-भाड़ में अगर जानवर की ज़िम्मेदारी किसी ने नहीं ली, तो वह भीड़ में खो जाता है।
घर में यह एक नियम बना लें: जानवर की निकासी की ज़िम्मेदारी एक खास व्यक्ति की होगी — और उसका बैकअप भी तय हो। अगर परिवार में बच्चे हैं, तो जानवर की ज़िम्मेदारी किसी वयस्क पर होनी चाहिए जिसके हाथ खाली रह सकें।
बुज़ुर्ग पालतू पशु मालिकों के लिए एक ज़रूरी बात: अगर वे अकेले रहते हैं, तो पड़ोसी या रिश्तेदार को पहले से बता दें कि उनके घर में जानवर है। Indian Red Cross (indianredcross.org) जैसी संस्थाएं कमज़ोर वर्ग के लोगों की मदद के लिए काम करती हैं, लेकिन उन्हें पता होना चाहिए कि ज़रूरत है।
अगर घर में कोई ऐसा व्यक्ति है जो चलने-फिरने में असमर्थ है, तो उनके साथ जानवर को भी एक ही बार में निकाला जाना चाहिए — दो बार आना संभव नहीं होता। इसीलिए जानवर का कैरियर हल्का और तैयार रहना ज़रूरी है।
घर पर आश्रय लेना हो तो: पालतू जानवर के लिए 72 घंटे की तैयारी
कभी-कभी निकलना संभव नहीं होता — सड़कें बंद हों, तूफान चरम पर हो, या रात का वक्त हो। ऐसे में घर पर ही आश्रय लेना पड़ता है। यह स्थिति भी तैयारी माँगती है।
घर पर 72 घंटे रहने की स्थिति में जानवर के लिए:
- खाना: कम से कम 3 दिन का स्टॉक, ऐसी जगह रखें जहाँ पानी न पहुँचे — यानी ऊँचाई पर
- पानी: जानवर के आकार के अनुसार — एक मध्यम कुत्ते को प्रतिदिन करीब 1-2 लीटर पानी चाहिए
- एक सुरक्षित जगह: घर का सबसे ऊँचा और बंद कमरा, जहाँ जानवर को बाँधा जा सके ताकि वह डर में भागे नहीं
- शोर से बचाव: तूफान और बाढ़ के दौरान जानवर बेहद घबरा जाते हैं — एक अंधेरा, शांत कोना उन्हें राहत देता है
यह भी याद रखें: बाढ़ के पानी में अनजान बीमारियाँ होती हैं। अगर जानवर उस पानी में गया हो, तो जल्द से जल्द पशु चिकित्सक को दिखाएँ। पालतू जानवर संकट में? अभी बनाएं सही आपातकालीन योजना — घर पर आश्रय लेने की पूरी तैयारी के लिए यह लेख देखें।
आज 10 मिनट में करने वाला एक काम
अगर यह पूरा लेख पढ़ने के बाद भी एक ही
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या भारत के सरकारी निकासी केंद्रों में पालतू जानवरों को अनुमति मिलती है?
भारत के अधिकांश सरकारी राहत शिविरों और निकासी केंद्रों में पालतू जानवरों को आधिकारिक रूप से अनुमति नहीं होती। इसलिए आपदा से पहले ही किसी पशु-अनुकूल होटल, रिश्तेदार के घर, या पशु आश्रय स्थल की पहचान करना ज़रूरी है।
पालतू जानवर के लिए आपातकालीन किट में क्या-क्या रखना चाहिए?
पालतू जानवर की आपातकालीन किट में कम से कम 3-7 दिन का खाना और पानी, दवाइयाँ, टीकाकरण रिकॉर्ड, पट्टा, पिंजरा और एक परिचित कंबल अवश्य होना चाहिए। जानवर की हालिया फोटो भी रखें ताकि बिछड़ने पर पहचान में मदद मिले।
आपदा के दौरान पालतू जानवर को घर पर अकेला छोड़ना सही है या नहीं?
पालतू जानवर को आपदा के दौरान घर पर अकेला छोड़ना जानलेवा हो सकता है, क्योंकि बाढ़ या चक्रवात में वे खुद को बचाने में असमर्थ होते हैं। NDRF और पशु कल्याण संगठन भी यही सलाह देते हैं कि जानवर को हमेशा निकासी योजना में शामिल करें।
भारत में आपदा के समय पालतू जानवर खो जाए तो क्या करें?
जानवर खोने पर तुरंत स्थानीय पशु चिकित्सालय, नगर पालिका और पास के आश्रय स्थलों को सूचित करें। जानवर के कॉलर पर मालिक का नाम और मोबाइल नंबर होना और माइक्रोचिप लगवाना सबसे प्रभावी पहचान उपाय है।
मानसून सीज़न से पहले पालतू जानवर के लिए कौन सी तैयारी सबसे ज़रूरी है?
मानसून से कम से
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तैयार 72-घंटे की आपातकालीन किट उन परिवारों के लिए उपयोगी है जिन्होंने अभी तक अपना गो-बैग नहीं बनाया है। इसे शुरुआत मानें, फिर परिवार के आकार के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज़, दवाइयाँ, नकद, चार्जर और पानी जोड़ें।
खरीदने से पहले स्थानीय उपलब्धता, डिलीवरी, परिवार के आकार और आधिकारिक सलाह की तुलना करें।
Amazon Associate के रूप में, योग्य खरीदारी से आय हो सकती है।

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