2020 में जब Amphan चक्रवात ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा के तटीय इलाकों को तबाह किया, तब निकासी केंद्रों में एक दृश्य बार-बार दोहराया गया — लोग अपने कुत्तों और बकरियों को लेकर आए, लेकिन राहत शिविर के दरवाजे पर उन्हें रोक दिया गया। कुछ परिवारों ने पालतू जानवर को बाहर बांधकर अंदर जाने की कोशिश की। कुछ वापस घर लौट गए। दोनों फैसले खतरनाक थे। सरकारी चेकलिस्ट में “पालतू जानवर” के लिए कोई खाना नहीं है — न शिविर में जगह, न निकासी के वक्त कोई तय प्रोटोकॉल। यह कमी सिर्फ एक बार की घटना नहीं है। बाढ़, चक्रवात, या भूकंप — जब भी आपदा आती है, पालतू जानवर रखने वाले परिवार एक ऐसी दोराहे पर खड़े हो जाते हैं जिसके लिए वे तैयार नहीं होते।
अगर आपके घर में कुत्ता, बिल्ली, पक्षी, या कोई और जानवर है — और आप मानसून के मौसम में रहते हैं — तो यह लेख उस एक सवाल का जवाब देता है जो हर मालिक को पहले से सोचना चाहिए: जब निकलने का वक्त आए, तो आप और आपका पालतू जानवर कहाँ जाएंगे?
- पहला काम आज ही करें: जानें कि आपके इलाके का आश्रय पालतू जानवर को अंदर लेता है या नहीं
- पालतू निकासी किट: वजन पहले, सामान बाद में
- निकलें या रुकें? पालतू जानवर के साथ यह फैसला अलग होता है
- मानसून और बाढ़ में पालतू जानवरों के लिए खास खतरे
- वो गलतियाँ जो स्थिति को और बुरा बना देती हैं
- बच्चे, बुजुर्ग और पालतू जानवर — एक साथ निकालना
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
पहला काम आज ही करें: जानें कि आपके इलाके का आश्रय पालतू जानवर को अंदर लेता है या नहीं
भारत के अधिकांश सरकारी राहत शिविर और बाढ़ आश्रय पालतू जानवरों को अनुमति नहीं देते। यह कोई छिपी बात नहीं है — लेकिन अधिकांश लोगों को यह तब पता चलता है जब वे जानवर के साथ दरवाजे पर पहुँच जाते हैं। इसलिए पहला काम यह नहीं है कि आप किट बनाएं — पहला काम यह है कि अभी फोन उठाएं और पता करें।
किससे पूछें:
- जिला पशु चिकित्सा अधिकारी (District Veterinary Officer) — हर जिले में होते हैं, नगर निगम या जिला कार्यालय से नंबर मिलता है।
- स्थानीय SDMA हेल्पलाइन — राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण। नंबर आपके राज्य की SDMA वेबसाइट पर मिलेगा।
- ग्राम पंचायत या नगर पालिका कार्यालय — वे जानते हैं कि निकटतम आश्रय में पशुओं के लिए व्यवस्था है या नहीं।
- स्थानीय पशु कल्याण संस्था (NGO) — कई शहरों में आपदा के दौरान वे अस्थायी पशु आश्रय चलाते हैं।
अगर आपके इलाके का आश्रय जानवरों को नहीं लेता, तो अभी एक वैकल्पिक जगह तय करें — कोई रिश्तेदार जो ऊँचे स्थान पर रहता हो, कोई दोस्त जिसके घर में जानवर की जगह हो, या कोई निजी पशु बोर्डिंग जो आपातकाल में खुली रहे। यह जानकारी बाद में ढूंढने की कोशिश मत करिए — पानी घुटने तक आने के बाद नेटवर्क काम नहीं करता।
पालतू निकासी किट: वजन पहले, सामान बाद में
आपदा राहत कार्यों में बार-बार एक ही बात सामने आती है — सबसे बड़ी गलती यह नहीं होती कि किट में कुछ था नहीं, बल्कि यह होती है कि किट इतनी भारी थी कि उठाई ही नहीं जा सकी। जिस परिवार में बुजुर्ग हैं, छोटे बच्चे हैं, और ऊपर से कुत्ते का पिंजरा भी है — वहाँ 15 किलो का बैग दरवाजे पर ही रह जाता है।
इसलिए पालतू जानवर के लिए किट बनाते वक्त नियम यह है: एक व्यक्ति एक हाथ से जानवर को संभाले, दूसरे हाथ से बैग उठाए — और चल सके। उसी हिसाब से सामान रखें।
एक छोटे से मध्यम आकार के पालतू जानवर के लिए 72 घंटे की किट में यह होना चाहिए:
- खाना: 3 दिन का — सूखा खाना ज्यादा हल्का होता है, डिब्बाबंद खाने से बचें अगर वजन समस्या है
- पानी: कम से कम 1.5 लीटर प्रति दिन (छोटे कुत्ते/बिल्ली के लिए) — कुल 4-5 लीटर; बड़े कुत्तों के लिए दोगुना
- कटोरा (फोल्डेबल): हल्का, सिलिकॉन का — आसानी से बैग में चला जाता है
- पट्टा और कॉलर: एक अतिरिक्त पट्टा — घबराहट में जानवर छूट जाते हैं
- दवाइयाँ: अगर जानवर कोई नियमित दवा लेता है, तो कम से कम एक हफ्ते की मात्रा
- टीकाकरण प्रमाणपत्र और पहचान दस्तावेज: कुछ आश्रय इसकी माँग करते हैं
- एक पुरानी टी-शर्ट या कपड़ा: जिसमें आपकी गंध हो — डरे हुए जानवर को शांत करता है
- छोटा फर्स्ट एड पाउच: एंटीसेप्टिक, पट्टी, दस्ताने
एक अच्छा विकल्प है हल्का, वाटरप्रूफ पालतू जानवर का कैरियर बैग जिसमें जानवर बैठ सके और ऊपर की जेब में उसका सामान भी आ जाए — बाढ़ के पानी में यह रोल-टॉप बैग की तरह काम करता है।
और इंसानों की किट के बारे में एक बात जो बार-बार देखी गई है: जो चीजें लोग सबसे ज्यादा भूलते हैं वो कोई बड़ी नहीं होतीं — नुस्खे की दवाइयाँ, चश्मा, छोटे नोटों में नकद। ये न हों तो बाकी सब तैयारी बेकार। पालतू जानवर की दवा और आपकी दवा — दोनों एक ही जगह, एक ही थैले में।
अपनी पूरी आपातकालीन किट की सूची के लिए देखें: आपातकालीन किट: विशेषज्ञों की ज़रूरी चीज़ों की असली सूची
निकलें या रुकें? पालतू जानवर के साथ यह फैसला अलग होता है
सामान्य घरों के लिए निकासी का फैसला अलग होता है, लेकिन जब पालतू जानवर साथ हो तो एक अतिरिक्त पेच आ जाता है। नीचे एक सरल नियम दिया गया है जो बिना किसी से पूछे काम करता है:
निर्णय नियम — पालतू जानवर के मालिक के लिए:
- अगर पानी आपके घर की दहलीज तक पहुँच गया है — अभी निकलें। जानवर को लेकर। इंतजार मत करें।
- अगर IMD का रेड अलर्ट आपके जिले के लिए है — उस रात से पहले ही वैकल्पिक आश्रय पहुँच जाएं।
- अगर बिजली 6 घंटे से ज्यादा गुल है और गर्मी 40°C से ऊपर है — कुत्तों और बिल्लियों में हीट स्ट्रेस जानलेवा हो सकता है; किसी ठंडी जगह जाएं।
- अगर जानवर बहुत बड़ा है और आप अकेले हैं — पड़ोसी की मदद अभी माँगें, निकासी से पहले।
एक बात जो अक्सर गलत समझी जाती है: “मेरा जानवर घर पर ठीक रहेगा, मैं वापस आ जाऊँगा।” 2018 की केरल बाढ़ में ऐसे दर्जनों मामले सामने आए जहाँ लोग पालतू जानवर को घर में बंद छोड़ गए और वापसी कई दिनों तक संभव नहीं हुई। घर में बंद जानवर के पास न खाना होता है, न बाहर निकलने का रास्ता। अगर आप निकल रहे हैं, तो जानवर को साथ लें या किसी जिम्मेदार व्यक्ति के पास छोड़ें — अकेला बंद मत करें।
घर में रहने या निकलने के विस्तृत फैसले के लिए पढ़ें: घर छोड़ें या रुकें? आपदा में सही फैसला कैसे करें
मानसून और बाढ़ में पालतू जानवरों के लिए खास खतरे
भारत में मानसून का मौसम (जून–सितंबर) असम, बिहार, उत्तराखंड, केरल जैसे राज्यों में बाढ़ और भूस्खलन लाता है। ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में चक्रवात का खतरा होता है। इस मौसम में पालतू जानवरों के लिए कुछ विशेष खतरे हैं जो आमतौर पर किसी चेकलिस्ट में नहीं होते:
लेप्टोस्पायरोसिस — बाढ़ के पानी में कुत्तों का सबसे बड़ा जोखिम
बाढ़ का पानी चूहों और अन्य जानवरों के मूत्र से दूषित हो सकता है, जिसमें लेप्टोस्पायरा बैक्टीरिया होता है। यह कुत्तों में तेज बुखार, उल्टी, और गुर्दे की विफलता का कारण बन सकता है। अगर आपके कुत्ते को यह टीका नहीं लगा है, तो मानसून से पहले पशु चिकित्सक से लेप्टोस्पायरोसिस का टीका लगवाएं। बाढ़ के बाद कुत्ते के पंजे और पेट को साफ पानी से धोएं।
गर्मी और बिजली कटौती में हीट स्ट्रेस
राजस्थान, तेलंगाना, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में गर्मियों में लंबी बिजली कटौती होती है। कुत्ते और बिल्लियाँ पसीना नहीं बहा सकते — वे हाँफकर तापमान नियंत्रित करते हैं। 40°C से ऊपर के तापमान में पंखा बंद हो तो हीट स्ट्रोक 30 मिनट में हो सकता है। ऐसे में ठंडे पानी में भिगोया कपड़ा जानवर की गर्दन और पंजों पर रखें और उसे ठंडी फर्श पर लिटाएं।
सामूहिक निकासी के बाद आवारा जानवरों की समस्या
जब किसी इलाके से बड़े पैमाने पर निकासी होती है, तो पालतू जानवर जो छूट जाते हैं वे आवारा जानवरों की तरह घूमने लगते हैं। ऐसे जानवर घबराए हुए और कभी-कभी आक्रामक होते हैं। अपने जानवर की पहचान के लिए नाम और मोबाइल नंबर वाला टैग कॉलर पर लगाएं — यह एक सस्ता लेकिन बेहद जरूरी काम है।
वो गलतियाँ जो स्थिति को और बुरा बना देती हैं
आपदा में पालतू जानवर के मालिक कुछ ऐसी गलतियाँ करते हैं जो देखने में समझदारी लगती हैं, लेकिन होती नहीं:
- जानवर को खुला छोड़ना “ताकि वो भाग सके”: खुला छोड़ा जानवर दूर चला जाता है, घबराहट में लौटता नहीं, और बाद में ढूंढना असंभव हो जाता है।
- पट्टा बहुत कसकर बाँधना: घबराया जानवर जोर से खींचता है — ढीला पट्टा नहीं, सही फिट का हार्नेस बेहतर है।
- जानवर को गाड़ी में अकेला छोड़ना: बंद गाड़ी में तापमान बहुत तेजी से बढ़ता है — 10 मिनट में जानलेवा हो सकता है।
- बाढ़ के पानी में जानवर को तैरने देना: थका हुआ जानवर डूब सकता है, और बाढ़ के पानी के बाद लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा।
- राहत शिविर पहुँचकर पहली बार पूछना: जैसा ऊपर बताया — पहले से पता कर लें।
- केवल जानवर के लिए अलग किट न बनाना: जानवर की दवा और खाना इंसान की किट में मिला देने से दोनों की चीजें अव्यवस्थित हो जाती हैं। एक छोटा अलग पाउच रखें।
बच्चे, बुजुर्ग और पालतू जानवर — एक साथ निकालना
संयुक्त परिवारों में जहाँ दादा-दादी, बच्चे और जानवर सब साथ हों, निकासी की योजना पहले से बनाना और भी जरूरी है। एक व्यक्ति के पास दो हाथ होते हैं — एक छोटे बच्चे को उठाने के लिए और एक बैग के लिए। ऐसे में जानवर किसके जिम्मे है, यह पहले से तय होना चाहिए।
एक व्यावहारिक तरीका: परिवार में हर काम किसी एक व्यक्ति को असाइन करें — “तुम दादी को संभालो, मैं बच्चे को, वो जानवर और बैग को।” यह बात पहले से बोल दें, आपदा के वक्त नहीं।
बच्चों को जानवर की निकासी में शामिल करना एक अच्छी आदत है — वे जानवर को शांत रखने में मदद कर सकते हैं, और इससे उनका अपना डर भी कम होता है। इस बारे में और पढ़ें: बच्चों संग आपदा से बचें: हर माता-पिता का फर्ज
बुजुर्गों के लिए एक खास बात: अगर घर में कोई बुजुर्ग है जो जानवर से बहुत जुड़ा है, तो उन्हें यह समझाना मुश्किल हो सकता है कि जानवर को पीछे छोड़ें। इसीलिए वैकल्पिक आश्रय पहले से
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपदा के समय पालतू जानवरों के लिए क्या तैयारी पहले से करनी चाहिए?
आपदा से पहले अपने पालतू जानवर का पहचान पत्र (ID tag), वैक्सीनेशन रिकॉर्ड और कम से कम 72 घंटे का खाना-पानी एक अलग बैग में तैयार रखें। इसके अलावा नजदीकी पशु-अनुकूल आश्रय या होटल की जानकारी पहले से ले लें, क्योंकि अधिकांश सरकारी राहत शिविर पालतू जानवरों को अनुमति नहीं देते।
भारत में बाढ़ या चक्रवात के दौरान पालतू जानवरों को राहत शिविर में जाने दिया जाता है?
अधिकतर सरकारी राहत शिविरों में पालतू जानवरों को प्रवेश की अनुमति नहीं होती, जैसा कि 2020 के Amphan चक्रवात के दौरान पश्चिम बंगाल और ओडिशा में देखा गया। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पहले से किसी भरोसेमंद रिश्तेदार, पड़ोसी या पशु आश्रय संस्था से संपर्क करके वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें।
आपदा के समय पालतू जानवर के लिए इमरजेंसी किट में क्या रखना चाहिए?
पालतू जानवर की इमरजेंसी किट में कम से कम 3 दिन का खाना और पानी, दवाइयां, वैक्सीनेशन कार्ड, एक फोटो (मालिक के साथ), पट्टा, और एक परिचित कपड़ा या खिलौना जरूर रखें। पक्षियों या छोटे जानवरों के लिए उनका पिंजरा या कैरियर बैग भी आपातकालीन सामान का हिस्सा होना चाहिए।
अगर निकासी के वक्त पालतू जानवर को साथ नहीं ले जा सकते तो क्या करें?
अगर साथ ले जाना संभव न हो तो जानवर को घर के सबसे ऊंचे और स
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तैयार 72-घंटे की आपातकालीन किट उन परिवारों के लिए उपयोगी है जिन्होंने अभी तक अपना गो-बैग नहीं बनाया है। इसे शुरुआत मानें, फिर परिवार के आकार के अनुसार ज़रूरी दस्तावेज़, दवाइयाँ, नकद, चार्जर और पानी जोड़ें।
खरीदने से पहले स्थानीय उपलब्धता, डिलीवरी, परिवार के आकार और आधिकारिक सलाह की तुलना करें।
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