2018 की केरल बाढ़ के बाद राहत शिविरों में जो एक चीज़ सबसे पहले खत्म हुई, वह खाना नहीं था — वह थीं दवाएं। मधुमेह के मरीज़ बिना इंसुलिन के थे। बुज़ुर्गों के पास उनकी ब्लड प्रेशर की गोलियां नहीं थीं। बच्चों की अस्थमा इनहेलर कहीं पीछे छूट गई थी। जो परिवार 72 घंटे पहले सुरक्षित घरों में थे, अब एक स्कूल की छत पर बैठे थे — और उनका असली संकट पानी का नहीं, दवाओं का था। राहत शिविरों में बार-बार एक ही पैटर्न देखा गया है: पहले दिन सब मिल-बांटकर गुज़ारा करते हैं। असली तकलीफ दूसरे दिन शुरू होती है — जब स्टॉक खत्म होने लगता है और बाहर से मदद अभी नहीं पहुंची होती। स्वास्थ्य ज़रूरतें आपदा के पहले घंटे में नहीं, बल्कि 36-48 घंटे बाद जानलेवा बन जाती हैं।
- अभी करें: दवाओं का बैकअप तैयार करना — और यह 10 मिनट का काम है
- इंसुलिन भंडारण: बिजली गुल होने पर क्या करें
- वह गलतफहमी जो लोगों की जान लेती है
- घर पर क्या रखें: स्वास्थ्य आपातकालीन किट की असली सूची
- बच्चे, बुज़ुर्ग, और विशेष स्वास्थ्य ज़रूरतें: ये सबसे पहले असुरक्षित होते हैं
- कब घर छोड़ें, कब रुकें: एक साफ निर्णय नियम
- वे गलतियां जो स्वास्थ्य संकट को दोगुना कर देती हैं
- आज, अभी, 10 मिनट में: एक काम जो सबसे ज़्यादा मायने रखता है
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अभी करें: दवाओं का बैकअप तैयार करना — और यह 10 मिनट का काम है
घर में जो भी नियमित दवा चल रही है — ब्लड प्रेशर, डायबिटीज़, थायरॉइड, अस्थमा — उसकी एक अलग “आपदा पर्ची” बनाएं। इस पर्ची पर दवा का नाम (generic name), खुराक, और डॉक्टर का नंबर लिखें। इसे एक waterproof ज़िप बैग में रखें और अपनी आपातकालीन किट में डालें।
अगले डॉक्टर विज़िट पर सीधे कहें: “मुझे 7-10 दिन का अतिरिक्त स्टॉक चाहिए — आपदा की तैयारी के लिए।” अधिकांश डॉक्टर यह समझते हैं, खासकर मानसून और चक्रवात के मौसम में। बाढ़-प्रवण राज्यों जैसे बिहार, असम, ओडिशा, और केरल में तो यह हर परिवार की ज़िम्मेदारी होनी चाहिए।
अगर आपके घर में कोई इंसुलिन लेता है, तो अभी यह तय करें कि बिजली जाने पर उसे कहां रखेंगे। इस सवाल का जवाब आपदा आने के बाद नहीं, आज ढूंढना है।
इंसुलिन भंडारण: बिजली गुल होने पर क्या करें
इंसुलिन को आमतौर पर 2°C–8°C पर रखा जाता है। लेकिन मानसून में जब घंटों बिजली नहीं रहती — खासकर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड के ग्रामीण इलाकों में — तो फ्रिज बेकार हो जाता है। एक बार खुली हुई इंसुलिन वायल 28 दिन तक कमरे के तापमान (25°C से नीचे) पर सुरक्षित रहती है — यह WHO और भारत के फार्माकोपिया दिशानिर्देशों पर आधारित जानकारी है।
बिजली जाने पर इंसुलिन को एक मिट्टी के बर्तन (clay pot) में रखें जिसमें थोड़ा पानी हो। यह देसी evaporative cooling तकनीक है — तापमान 6-8°C तक कम हो सकता है। बाज़ार में उपलब्ध insulated insulin travel cases भी एक अच्छा विकल्प हैं जो बिना बिजली के घंटों तक तापमान बनाए रखते हैं।
निर्णय नियम: अगर इंसुलिन रंग बदल जाए, धुंधली हो जाए, या उसमें कण दिखें — तो उसे इस्तेमाल न करें। यह एकमात्र घरेलू परीक्षण है जो बिना किसी उपकरण के किया जा सकता है। बिजली की तैयारी के लिए हमारा यह लेख भी देखें: बिजली गुल हो तो क्या करें? घर की तैयारी गाइड
वह गलतफहमी जो लोगों की जान लेती है
सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि “सरकारी राहत टीम आएगी और सब संभाल लेगी।” असली तस्वीर यह है: Amphan चक्रवात (2020, पश्चिम बंगाल और ओडिशा) के बाद कई तटीय गांवों तक राहत टीम 48-72 घंटे बाद पहुंची। इस बीच जो परिवार अपनी ज़रूरत का सामान लेकर निकले थे, वे ठीक रहे। जो “कोई न कोई आ जाएगा” सोचकर बैठे थे, वे सबसे ज़्यादा परेशान हुए।
दूसरी गलतफहमी: “मुझे तो कोई बीमारी नहीं है, मुझे दवाओं की ज़रूरत नहीं।” लेकिन आपदा राहत शिविरों में पानी से होने वाली बीमारियां — दस्त, उल्टी, टाइफाइड — किसी को भी हो सकती हैं। ORS (ओरल रिहाइड्रेशन साल्ट) के पैकेट, पेरासिटामोल, और Betadine हर परिवार की किट में होने चाहिए — भले ही घर में कोई “बीमार” न हो।
तीसरी गलतफहमी: राहत शिविरों में सूचना का सबसे बड़ा अभाव होता है। अफवाहें फैलती हैं, हर कोई अधूरी जानकारी पर फैसले लेता है। जो परिवार पहले से NDMA हेल्पलाइन नंबर (1078) और अपने District Collector के दफ्तर का नंबर जानते हैं, वे भरोसेमंद स्रोत से जानकारी पा सकते हैं।
घर पर क्या रखें: स्वास्थ्य आपातकालीन किट की असली सूची
सामान्य “first aid kit” और “health emergency kit” में फर्क होता है। पहले में पट्टियां और antiseptic होता है। दूसरे में वह सब होता है जो 3-5 दिन की आपदा में एक परिवार को चाहिए।
- नियमित दवाएं: कम से कम 7 दिन का स्टॉक, waterproof थैले में
- ORS पैकेट: कम से कम 10 पैकेट (खासकर बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए)
- पेरासिटामोल: वयस्क और बच्चे दोनों की खुराक
- Antacid और anti-diarrheal: बाढ़ के बाद पानी दूषित होने पर यह सबसे ज़रूरी होती हैं
- Betadine / antiseptic solution: घाव की सफाई के लिए
- Sterile bandage, gauze, adhesive tape: कम से कम 5 दिन का
- थर्मामीटर: digital, बैटरी सहित
- Blood pressure cuff (अगर घर में ज़रूरत हो): manual aneroid cuff बिजली पर निर्भर नहीं
- Prescription copies और health records: laminated या zip bag में
- पानी की गोलियां (Water purification tablets): बाढ़ में पीने का पानी दूषित हो जाता है
पानी के बारे में एक ज़रूरी बात — प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 3 लीटर पीने का पानी अलग से रखें। 4 लोगों के परिवार के लिए 3 दिन के लिए 36 लीटर। बाढ़ में शौचालय की समस्या भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती होती है — इस पर विस्तार से पढ़ें: पानी बिना सफाई: जानें कौन सा आपातकालीन शौचालय सही?
बच्चे, बुज़ुर्ग, और विशेष स्वास्थ्य ज़रूरतें: ये सबसे पहले असुरक्षित होते हैं
संयुक्त परिवारों में — जो भारत में आम हैं — अक्सर तीन पीढ़ियों की दवाएं एक साथ मैनेज करनी पड़ती हैं। दादा-दादी की दवाएं अलग, बच्चों की अलग, और बीच की पीढ़ी की अलग। आपदा में यह सब अलग-अलग संभालना असंभव हो जाता है जब तक कि पहले से एक ही waterproof थैले में सब कुछ एकत्रित न हो।
बच्चों के लिए खास बात: बाढ़ और चक्रवात के बाद बच्चों में दस्त और निर्जलीकरण (dehydration) सबसे आम स्वास्थ्य समस्या है। ORS घोल बनाने का तरीका परिवार के हर वयस्क को पता होना चाहिए — 1 लीटर साफ पानी में 1 ORS पैकेट घोलें, हर 5 मिनट में थोड़ा-थोड़ा पिलाएं। बच्चों की आपदा तैयारी के बारे में और जानें: बच्चों के साथ आपदा में कैसे बचें? जानें सही तरीका
बुज़ुर्गों के लिए: मानसून में गर्मी और उमस से heat stroke का खतरा रहता है, खासकर राजस्थान, तेलंगाना, और विदर्भ क्षेत्र में। राहत शिविरों में पर्याप्त पंखे या ठंडक नहीं होती। एक manual spray bottle और ORS बुज़ुर्गों की किट में ज़रूर रखें। जो बुज़ुर्ग wheel chair या walker पर हैं, उनकी निकासी योजना पहले से बनाएं — आपदा में यह सोचने का समय नहीं मिलता।
मानसिक स्वास्थ्य को नज़रअंदाज़ न करें: आपदा के बाद बच्चों और बुज़ुर्गों में anxiety और trauma के लक्षण दिखते हैं। Indian Red Cross की गाइडलाइन के अनुसार, psychological first aid — यानी शांत आवाज़ में बात करना, सच्ची और सीमित जानकारी देना, और शारीरिक ज़रूरतें पूरी करना — इसका पहला कदम है। (Indian Red Cross)
कब घर छोड़ें, कब रुकें: एक साफ निर्णय नियम
यह सबसे मुश्किल सवाल है जो आपदा में हर परिवार के सामने आता है। अधिकारियों का इंतज़ार करने की सलाह ठीक है — लेकिन हमेशा काम नहीं आती। इसलिए यह नियम याद रखें:
- अगर पानी आपके दरवाज़े तक आ गया है — तुरंत निकलें। आधिकारिक निकासी आदेश का इंतज़ार न करें।
- अगर घर में कोई इंसुलिन-dependent मरीज़ है और बिजली 6 घंटे से ज़्यादा गुल है — और backup cooling नहीं है — तो नज़दीकी सरकारी अस्पताल या PHC (Primary Health Centre) तक पहुंचना प्राथमिकता बनाएं।
- अगर घर kaccha (कच्चा) है और IMD ने orange या red alert जारी किया है — घर से निकलें। Pucca घर में रहना तब समझ में आता है जब ऊपरी मंज़िल सुरक्षित हो।
- IMD का मानसून अलर्ट रोज़ चेक करें: mausam.imd.gov.in
निकासी के दौरान गाड़ी से जुड़े खतरे अलग होते हैं। बाढ़ के पानी में गाड़ी कब और कैसे छोड़ें, यह जानना ज़रूरी है: बाढ़ में फंसी गाड़ी से जान कैसे बचाएं?
वे गलतियां जो स्वास्थ्य संकट को दोगुना कर देती हैं
राहत शिविरों में एक पैटर्न बार-बार दिखता है: जो लोग सबसे ज़्यादा परेशान होते हैं, वे वे नहीं होते जिनके पास खाना नहीं था — बल्कि वे होते हैं जिनके पास सूचना नहीं थी। किसे क्या मिलेगा, कब मिलेगा, किस काउंटर पर जाना है — यह अफवाहों में खो जाता है। जो परिवार NDMA हेल्पलाइन (1078) और अपने Gram Panchayat या Ward Officer का नंबर पहले से जानते थे, उन्होंने सही जानकारी पाई और सही फैसले लिए।
अन्य आम गलतियां जो स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती हैं:
- बाढ़ के पानी में चलना: इसमें सीवेज, chemicals, और लेप्टोस्पायरोसिस के बैक्टीरिया हो सकते हैं। अगर चलना ज़रूरी हो तो पैरों पर घाव होने पर तुरंत antiseptic लगाएं।
- बिना जांचे पानी पीना: बाढ़ के बाद नल का पानी भी दूषित हो सकता है। पानी उबालें या purification tablet का उपयोग करें।
- दवा की खुराक खुद बदलना: तनाव में लोग सोचते हैं “थोड़ी ज़्यादा ले लें ताकि बाद में न लेनी पड़े।” यह खतरनाक है — खासकर ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ की दवाओं में।
- बासी खाना खाना: राहत शिविरों में खाना कभी-कभी ज़्यादा देर से बांटा जाता है। संदिग्ध खाना न खाएं — ORS और dry biscuits बेहतर हैं।
- बच्चों को बाढ़ के पानी में खेलने देना: यह infection का सबसे आसान रास्ता है।
आज, अभी, 10 मिनट में: एक काम जो सबसे ज़्यादा मायने रखता है
अगर आप अभी सिर्फ एक काम कर सकते हैं — तो यह करें: घर में जो भी नियमित दवाएं चल रही हैं, उनकी एक सूची बनाएं। दवा का नाम, खुराक, और डॉक्टर का फोन नंबर। इसे एक ज़िप बैग में रखें और उसी बैग में अपना आधार कार्ड की फोटोकॉपी भी डालें।
यह एक काम आपदा में आपकी — और आपके परिवार की — सबसे बड़ी मदद करेगा। राहत शिविरों में स्वास्थ्यकर्मी सबसे पहले यही पूछते हैं: “कौन सी दवा चाहिए?” और जिनके पास लिखित जानकारी होती है, उन्हें सही दवा मिलती है। जिनके पास नहीं होती, वे अंदाज़ें से बताते हैं — और गलत दवा मिलने का खतरा रहता है।
NDMA ने आपदा तैयारी के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए हैं, उनमें स्वास
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपदा के दौरान कितने दिनों की दवाओं का बैकअप रखना चाहिए?
विशेषज्ञ कम से कम 7 दिनों की दवाओं का आपातकालीन स्टॉक अलग रखने की सलाह देते हैं, क्योंकि बड़ी आपदाओं में राहत और चिकित्सा सहायता पहुंचने में 72 घंटे से अधिक समय लग सकता है। 2018 की केरल बाढ़ जैसी स्थितियों में देखा गया कि 36-48 घंटे बाद दवाओं की कमी जानलेवा संकट बन गई।
डायबिटीज़ के मरीज़ बाढ़ या भूकंप जैसी आपदा में इंसुलिन कैसे सुरक्षित रखें?
इंसुलिन को 2-8°C तापमान पर रखना आदर्श है, लेकिन आपदा की स्थिति में खुली इंसुलिन को 28°C से कम तापमान पर 28 दिन तक उपयोग किया जा सकता है। आपातकालीन किट में इंसुलिन के साथ एक इंसुलेटेड पाउच, अतिरिक्त सीरिंज और ग्लूकोज़ टेस्टिंग स्ट्रिप्स ज़रूर रखें।
राहत शिविर में अस्थमा अटैक आने पर क्या करें अगर इनहेलर न हो?
इनहेलर के बिना अस्थमा अटैक में तुरंत सीधे बैठें, धीमी और गहरी सांसें लें, और शिविर के चिकित्सा स्वयंसेवक या NDRF मेडिकल टीम को तुरंत सूचित करें। राहत शिविरों में सरकारी प्रोटोकॉल के तहत Salbutamol इनहेलर और नेबुलाइज़र रखे जाते हैं, इसलिए मेडिकल काउंटर पर अपनी बीमारी पहले दिन ही दर्ज कराएं।
आपदा से पहले घर में कौन-सी दवाएं और मेडिकल सामान ज़रूर रखना चाहिए?
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